दुधारू पशुओं के लिए पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास का अनुपम उपहार संवृद्धि (तरल कैल्शियम)

दुधारू पशुओं के लिए पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास का अनुपम उपहार संवृद्धि (तरल कैल्शियम)

डॉ. बी.आर.जे. माथुर 

पशु चिकित्सा सेवा प्रबन्धक, पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास, हरिद्वार

भारतवर्ष के पशुपालकों के बीच पतंजलि केल्शियम के नाम से लोकप्रिय पूरक पशु आहार (फीड सप्लीमेंट) संवृद्धि पशुओं को स्वस्थ एवं उत्पादनशील रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण उत्पाद है।
अधिकांश पशु पालक जानते हैं कि दुधारू पशुओं को स्वस्थ, शारीरिक वृद्धि एवं उनके दूध उत्पादन को अधिकतम स्तर पर निरन्तर एवं दीर्घकाल तक बनाये रखने के लिए पशु के आहार में केल्शियम की समुचित मात्रा होनी आवश्यक है। इसलिए पशु पालक उनके पशुओं के आहार में हरा एवं सूखा चारा, संतुलित पशु आहार, खल, चूरी, चूनी व अनाज के अतिरिक्त पशु पूरक आहार के रुप में कैल्शियम किसी न किसी रूप में अवश्य देते हैं।
पशुओं के शारीरिक वृद्धि, मांसपेशियों की मजबूती एवं कार्यशीलता, नियमित, प्रजनन चक्र, हड्डियों के विकास एवं मजबूती तथा दुग्ध उत्पादन हेतु उनको कैल्शियम-फॉस्फोरस इत्यादि लवणों तथा विटामिन्स विशेषत: विटामिन D-3 की आवश्यकता रहती है। बच्चों की शारीरिक वृद्धि का आंकलन हड्डियों के विकास से ही अनुभव किया जाता है और इसके लिए कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन D-3 की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। 1 लीटर दूध में लगभग 10 ग्राम खनिज लवण होते हैं और इन 10 ग्राम खनिज लवणों में 2 ग्राम कैल्शियम की उपस्थिति रहती है। अत: प्रति लीटर दूध के माध्यम से हम पशु के शरीर से २ ग्राम कैल्शियम प्राप्त करते हैं।
प्रकृति ने प्रत्येक माँ के उसके नवजात शिशु को पालने के लिए संम्पूर्ण संतुलित आहार उसके शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु दूध के रूप में प्रदान किया है। इसलिए मनुष्य अपनी माँ का दूध नहीं मिलने की अवस्था में एवं तंदुरुस्ती के लिए दुधारू पशुओं बकरी, गाय, भैंस इत्यादि का दूध अपने आहार में सम्मिलित करता है। यह दूध, दही, छाछ, मक्खन, घी, पनीर इत्यादि के रूप में लिया जाता है।
मनुष्य के दैनिक उपयोग में किसी न किसी रूप में दूध का उपयोग किया जाता है इसलिए वैज्ञानिक दुधारू पशुओं से उन्नत पोषण, प्रबंधन व प्रजनन के माध्यम से अधिकाधिक दूध उत्पादन के शोध में प्रयासरत हैं।
बाजार में विभिन्न कम्पनियों द्वारा पशु-पूरक आहार के रूप में कैल्शियम विपणन किया जाता है। अधिकांश यह तरल रूप में 5 लीटर पैकिंग में बेचा जाता है। किन्तु इसके मूल्यों में 200 रुपये प्रति 5 लीटर से लेकर 1200 रुपये प्रति 5 लीटर का भारी अन्तर है। दूध बढ़ाने के क्लेम पर कैल्शियम के विक्रय में पशु पालकों से बहुत बड़ी ठगी की जाती है। अन्र्तराष्ट्रीय कम्पनियां जो कैल्शियम बेचती हैं उनके अधिकारियों/कर्मचारियों की बड़ी तनख्वाह, बड़े-बड़े विज्ञापन, आकर्षक पैकिंग, विक्रय शृंखला-सी.एण्डएफ.ए., सुपर डीलर्स, डीलर्स, सब डीलर्स, रिटेलर्स के भारी मुनाफे, पशु चिकित्सकों को आकर्षक उपहार इत्यादि के रूप मे खूब खर्चा किया जाता है अत: उत्पादन मूल्य से कई गुना मूल्य पर बेचा जाता है जो निर्माता बहुत कम मूल्य 200-300 रुपये प्रति 5 लीटर पशुपालक के घर आकर दे जाते हैं। वे बड़ी ठगाई करते हैं। वे कैल्शियम के नाम पर स्टार्च युक्त रंगीन मीठा पानी ही दे जाते हैं इससे पशु के शरीर में कैल्शियम की पूर्ति होने के बजाय अधिक कमी हो जाती है।
पतंजलि का संवृद्धि कैल्शियम पूरक पशु आहार में वे सभी घटक विद्यमान हैं जो दुधारू व अन्य पशुओं में कैल्शियम एवं शक्ति की पूर्ति करने के लिए आवश्यक हैं।
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कैल्शियम -

यह शरीर में सभी क्रियाएं सुचारू रूप से चलाने, हड्डियों के विकास, वृद्धि एवं मजबूत बनाने के लिए दुग्ध उत्पादन के लिए गर्भावस्था में गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण एवं आवश्यक तत्व है। इसकी शरीर में कमी हो जाने पर निम्न रोग एवं गंभीर दुष्परिणाम हो जाते हैं।
-हड्डियों की वृद्धि एवं मजबूती अवरूद्ध हो जाती है जिसके फलस्वरूप छोटे बच्चों/बछड़ों की शारीरिक वृद्धि रुककर हड्डियां मुड़ जाती है इस रोग को रिकेट्स (Ricketes) कहते हैं। बड़ी उम्र में कैल्शियम के कारण हड्डियां कमजोर व खोखली हल्की हो जाती है जिसके फलस्वरूप मामूली चोट लगने अथवा कई बार शारीरिक भार के कारण हड्डियों में फ्रैक्चर हो जाता है। इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) कहते हैं।
दुधारू पशुओं के कैल्शियम की कमी के कारण दुग्ध उत्पादन की मात्रा, अवधि तथा गुणवत्ता में कमी आ जाती है। कैल्शियम की समुचित मात्रा (प्रति लीटर दुग्ध उत्पादन के लिए 2 ग्राम कैल्शियम) उपलब्ध नहीं होने कारण पहले तो हड्डियों में संघारित कैल्शियम निकलना प्रारंभ हो जाता है और तत्पश्चात् दूध उत्पादन कम होता हुआ बन्द हो जाता है और पशु का शुष्क काल (Dry Period) बढ़ जाता है।
प्रसव के समय कैल्शियम की कमी के कारण प्रसव बहुत पीड़ादायक होकर सामान्य प्रसव नहीं होता है। गर्भाशय की मांसपेशियां आसक्त होने के फलस्वरूप प्रसव के लिए गर्भाशय का समुचित संकुचन संभव नहीं होता है और प्रसव सामान्य नहीं हो पाता है इस स्थिति को (Utezinejneztia) कहते हैं।
प्रसव के पश्चात् (Post Partuzition) CA की कमी के कारण सबसे महत्वपूर्ण व्याधि दुग्ध ज्वर (Milk Fever) हो जाता है। पशु की मांसपेशियां कमजोर-आसक्त हो जाने के फलस्वरूप पशु खड़ा नहीं हो सकता। शारीरिक तापमान सामान्य से कम हो जाता है। पशु अपनी गर्दन पीछे की तरफ मोडक़र बैठ जाता है। मुँह से लार गिरने लगती है और पशु की शारीरिक क्रियाएं शिथिल होते हुए शून्य हो जाती हैं। अन्त में श्वसन क्रिया अवरूद्ध हो जाने अथवा हृदयगति रुक जाने के फलस्वरूप पशु की मृत्यु हो जाती है। ऐसी स्थिति  में रक्त में कैल्शियम की मात्रा अविलम्ब बढ़ाना अतिआवश्यक हो जाता है। इसके लिए पतंजलि ग्रामोद्योग द्वारा अविलम्ब कैल्शियम की आपूर्ति के लिए संवृद्धि जैल का निर्माण किया गया है।
संवृद्धि जैल में कैल्शियम Tonic स्थिति में होने के कारण रक्त में तुरंत कैल्शियम की सांद्रता इसको पिलाने से बढ़ जाती है। संवृद्धि जैल लम्बी गर्दन वाली नालनुमा प्लास्टिक की बोतल में उपलब्ध करवायी गई है ताकि इसी बोतल से पशु को आराम से पिलाया जा सके।

कैल्शियम की आपूर्ति के लिए संवृद्धि ही क्यों?

संवृद्धि तरल पशुओं के लिए संतुलित शुद्ध शाकाहारी कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन्स, जड़ी-बूटीयुक्त होने के कारण पशु के शरीर में अधिकतम मात्रा में अवशोषित होकर कैल्शियम की पूर्ति करता है। कैल्शियम किसी भी रुप में अथवा किसी के साथ मिलाकर खिलाने से शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति संभव नहीं है। कैल्शियम-फॉस्फोरस का एक निश्चित अनुपात 2:1 का शरीर में संघारित होता है। अत: संवृद्धि में इसी अनुपात में कैल्शियम और फॉस्फोरस उपलब्ध है, जिससे शरीर में कैल्शियम के साथ-साथ फॉस्फोरस की आपूर्ति हो सके, जो कैल्शियम के उपयोग हेतु आवश्यक है।
कैल्शियम के शरीर में अवशोषण के लिए विटामिन-डी की उपस्थिति आवश्यक होती है। अत: इसका भी समुचित मात्रा में संवृद्धि में समावेश किया गया है।
संवृद्धि को अधिक उपयोगी बनाने के लिए इसमें विटामिन-ए एवं विटामिन-बी१२ का भी समावेश किया गया है, जिससे पशु का प्रजनन चक्र नियमित रहता है। चर्म, दांत के स्वास्थ्य, रोग-प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने में विटामिन-ए का महत्वपूर्ण स्थान है। विटामिन- बी१२ जोकि भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्रिया में आवश्यक है, दुधारु पशुओं में भोजन से दूध बनाने की प्रक्रिया में आवश्यक है। अत: इसका भी संवृद्धि में समावेश किया गया है।
चूंकि संवृद्धि तरल पतंजलि उत्पाद है तो इसमें महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियां मिलाकर इसको दुधारु पशुओं के लिए और अधिक उपयोगी एवं गुणवत्तायुक्त बनाया गया है।

सिलिमेरीन -

इसे मिल्क थिसल (Milk Thistile) के रूप में जाना जाता है। दूध उत्पादन के लिए यह एक विश्वस्तरीय, जड़ी-बूटी है। यह यकृत की क्रियाशीलता के लिए भी अमृत तुल्य है।

शतावरी -

दुग्ध उत्पादन, स्वास्थ्य एवं जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए शतावरी एक जानी-मानी औषधि है। आयुर्विज्ञान के अनुसार शतावर शरीर में वात-पित्त को नियंत्रित रखती है।

जीवन्ती -

Leptadenia Reticulata के स्राव को बढ़ाता है। दूध उतारने की (Let down of Milk) प्रक्रिया को जीवन्ती तीव्र करती है। जो पशु जितना जल्दी दूध उतारता है उसका दूध उत्पादन भी अधिक होता है।

पाइपर लोंगम -

यह भूख और पाचन शक्ति बढ़ाने तथा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए जानी मानी औषधि है। इस प्रकार हम देखते हैं कि पतंजलि संवृद्धि केवल कैल्शियमपूरक पशु आहार नहीं होकर दुधारु पशुओं एवं पशु पालकों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए एक वरदान है। यह कैल्शियम के साथ-साथ फॉस्फोरस, विटामिन-ए, डी3, बी12, ऊर्जा, सेलिमेरीन, शतावरी, जीवन्ती, पाइपर लोंगम, नीम इत्यादि महत्वपूर्ण तत्वों से युक्त होने के कारण बाजार में उपलब्ध कैल्शियम से भिन्न एवं अधिक गुणवत्तायुक्त है।
संवृद्धि तरल 1, 5, 10 एवं 20 लीटर के बहुउपयोगी जार में उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अतिरिक्त संवृद्धि गोल्ड जिसमें कैल्शियम-फॉस्फोरस की मात्रा संवृद्धि तरल की अपेक्षा दो-गुनी से भी अधिक है। यह भी अधिक दूध देने वाले पशुओं के लिए उपलब्ध है। संवृद्धि जैल 300 मिली. की नालनुमा बोतल में उपलब्ध करवाया जाता है।
पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास सभी उत्पादों को ओर अधिक गुणवत्तायुक्त उपयोगी एवं न्यूनतम मूल्यों पर पशु पालकों को उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है और इसके लिए सतत् प्रतत्नशील है।f

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