कैंसर रोग में दुष्परिणाम रहित अत्यंत लाभकारी है प्राकृतिक चिकित्सा
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डॉ. रानी शर्मा
वरिष्ठ प्राकृतिक चिकित्सिका
मैं डॉ. रानी शर्मा अपने बारे में कुछ बताना चाहती हूँ। मैं प्राकृतिक चिकित्सक (Naturopath) होने के साथ साथ एक cancer survivor भी हूँ, इसलिए मैंने इस दर्द को महसूस किया है। मैं लीवर कैंसर (Lever Cancer) से पीडि़त हूँ।
मेरे उपचार की प्रक्रिया थी जिसमें पहले 3 किमोथैरेपी (Chemotherapy) फिर पेट की सर्जरी (Abdomen Surgery) और फिर दोबारा 3 किमोथैरेपी। पहले वाली 3 किमोथैरेपी में मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई क्योंकि मैं एलोपैथी चिकित्सा के साथ प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy treatment) लेती रही। मगर ऑपरेशन (Surgery) के बाद मुझे प्राकृतिक चिकित्सा को रोकना पड़ा क्योंकि मेरे पेट की High-Pack Surgery हुई थी। यहीं से मेरा दर्द भरा समय शुरू हुआ।
अब तीनों किमोथैरेपी में मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा क्योंकि मुझे कब्ज़ हो गई जिसकी वजह से उल्टियां लग गई। अब मेरा उपचार रैडिएशन थैरेपी (Radiation Therapy) से हो रहा है और 3 महीने के लिए under observation हूँ। मैं अब अच्छा महसूस कर रही हूँ। ये उपचार बहुत महंगा है। गरीब व्यक्ति के लिए यह उपचार कराना संभव नहीं है।
आज मुझे गांधी जी की बहुत याद आ रही है और उनके सपने भी। उन्होंने भारतवर्ष में अनेक चिकित्सालय खोले थे। वो कहते थे ‘मेरा देश गरीब है, लोगों के पास उनका इलाज करवाने के लिए पैसा नहीं है।’इसलिए वह लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा के लिए जागरूक करते थे और खुद अपने हाथों से उनका इलाज करना शुरू करते थे।
विदेश में पैसा है मगर जो मेरे देश में है वो विदेश में नहीं। कुदरत ने मेरे देश में गंगा मैया जैसी नदियां बहाई है जो पहाड़ों से निकलती है और वहाँ के खनिज लवण, जड़ी-बूटियाँ अपने साथ बहा कर लाती है जिसकी वजह से मेरे गंगा का पानी औषधि बन जाता है। उसी पानी से अब अनाज पैदा होता है जो उसको खाकर शरीर को जो ताकत मिलती है उससे अपने आप शरीर की चिकित्सा हो जाती है। इसलिए हमारे गरीब देश को दवाइयों की ज़रूरत नहीं है। गांधी जी ने उस समय सोचा था कि अगर एनिमा से बड़ी आंत साफ है, तो कोई बीमारी नहीं हो सकती। उनकी दूरदर्शिता देखिए!
महात्मा गांधी ने मेरे भारतवर्ष में कितने प्राकृतिक चिकित्सालय खोले थे, मगर आज उनकी स्थिति क्या है? प्राकृतिक चिकित्सालय काम कर रहे हैं या उन पर ताले लग चुके हैं? कैंसर के मरीज़ एलोपैथ उपचार से तो ठीक हो रहे हैं मगर उन दवाओं के दुष्प्रभाव (side effects) से मर रहे हैं।
मेरा मानना है कि देश में जितने भी कैंसर अस्पताल है उनमें एक प्राकृतिक चिकित्सालय भी होना चाहिए। जब कैंसर का ट्रीटमेंट पूरा हो जाए तो उसके साइड इफेक्ट को दूर करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा का सहारा लिया जाना श्रेष्यकर होगा। प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा कम से कम पैसों में किसी की बीमारी का उपचार किया जा सकता है।
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