युवाओं के लिए योगाभ्यास यौगिक जॉगिङ्ग

युवाओं के लिए योगाभ्यास यौगिक जॉगिङ्ग

हज या सूक्ष्म व्यायाम में कुल बारह क्रियाओं का समावेश है। यद्यपि इनका अलग से कोई नाम नहीं है, इन्हें मात्र स्थिति-संख्या के रूप में ही जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सूक्ष्म व्यायामों का मुख्य उद्देश्य शरीर में स्फूर्ति लाकर आसन-प्राणायाम के लिए शरीर को तैयार करना है। इसीलिए इसे आसन-प्राणायाम के पूर्व करने का विधान है। प्रस्तुत हैं सूक्ष्म व्यायाम की स्थितियां:-
स्थिति 1: प्रारम्भिक स्थिति में सहज रूप से एक ही स्थान पर खड़े होकर इस प्रकार दौड़ें, जिसमें लम्बा गहरा श्वास लेते व छोड़ते हुए बन्द मुट्ठी सहित हाथों की कोहनियाँ मुड़कर सामने से कन्धों तक आयें तथा नीचे सीधी होकर जंघाओं के बगल तक जायें। इसी क्रिया के दौरान पैरों के घुटने इस प्रकार मोड़ें कि एडिय़ाँ नितम्बों से यथासम्भव स्पर्श करें। इस क्रिया में वेगात्मक रूप से एक हाथ मोडऩे के दौरान नीचे से उसी तरफ  का पैर मुड़ेगा।

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श्वास विधि: दायें हाथ व दायें पैर को मोड़ते समय लम्बा श्वास भरना व विपरीत ओर से करते हुए श्वास बाहर छोडऩा आदर्श विधि है।
स्थिति 2: दूसरी क्रिया में पहली स्थिति के अन्तर्गत हाथों की कोहनियाँ न मोड़ते हुए, उन्हें यथासम्भव ऊपर की ओर सीधा करें तथा सीधा रखते हुए नीचे जंघाओं के बगल तक लायें, बारी-बारी से पंजों पर खड़े होकर घुटनों को यथाशक्ति मोड़ते हुए एडिय़ों को नितम्बों से लगाने का प्रयास करें। श्वास क्रम पहली स्थिति के समान रहेगा।

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स्थिति 3: तीसरी स्थिति में कमर पर हथेलियाँ रखकर सामने से उछलकर वेगात्मक रूप से एक पैर के घुटने को मोड़ते हुए उसे यथासम्भव छाती व सिर से ऊपर तक उठाने का प्रयास करें; फिर श्वास छोड़कर मुड़े हुए घुटने को नीचे वापस लाने के तुरन्त बाद श्वास भरते हुए दूसरे पैर से आवृत्ति दोहरायें।

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स्थिति 4: चौथी क्रिया में पैर के दोनों पंजों में कन्धों के समान्तर दूरी रखते हुए खड़े होकर दोनों हथेलियाँ कमर पर रखें; फिर श्वास छोड़ते हुए वेगात्मक रूप से पैरों को घुटनों से मोड़कर नीचे जायें (ध्यान रखें कि नीचे यथासम्भव उतना ही जायें कि कमर ऊपर से सीधी रहे); फिर श्वास लेते हुए घुटनों को सीधा करके वापिस ऊपर आने के तुरन्त बाद आवृत्ति दोहरायें।

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स्थिति 5: दोनों पैरों में अधिक से अधिक फासला करके खड़े होकर दोनों हाथ सामने जमीन के समानान्तर फैलायें, फिर श्वास छोड़ते हुए एक ओर घुटना मोड़कर उसी पैर के पंजे पर, कमर सीधी रखते हुए बैठें (नितम्ब एड़ी से लग जायेंगे), फिर श्वास लेते हुए मध्य में आयें। दूसरी ओर से भी इस क्रिया को वेगात्मक रूप से करें।

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स्थिति 6: पैरों में अधिक से अधिक फासला रखते हुए दोनों हथेलियों को कमर पर रखकर सीधे खड़े हो जायें, तत्पश्चात् एक तरफ  के पंजे की ओर शरीर को घुमाकर श्वास लेते हुए उस ओर का घुटना मोड़कर पंजे पर बैठें, कमर को अधिक से अधिक सीधा रखने का प्रयास करें तथा पीछे वाले पैर का घुटना सीधा व पंजा खड़ा रहेगा; फिर श्वास छोड़ते हुए वापिस आयें, इसी प्रकार दूसरी तरफ से करें।

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स्थिति 7: इसमें दोनों पैरों के पंजों में 2-3 फीट का अन्तर रखते हुए खड़े हो जायें; फिर दोनों हाथों को जमीन के समानान्तर सामने फैलायें, तत्पश्चात् श्वास भरते हुए वेगात्मक रूप से हाथों को बगल तक लाकर पीछे ले जायें (हाथों को पीछे ले जाते समय कन्धे व सामने से छाती तथा गर्दन खुलकर पीछे की ओर झुकती है); फिर श्वास छोड़ते हुए हाथों को पूर्व की भाँति सामने लायें (कन्धे हल्के से आगे की ओर झुकेंगे); तत्पश्चात् तुरन्त श्वास भरकर आवृत्ति दोहरायें।

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स्थिति 8: दोनों पंजों में यथासम्भव अन्तर रखते हुए, खड़े होकर लम्बा गहरा श्वास भरते हुए एक हाथ को वेगात्मक रूप से कान के पास सीधा उठाकर विपरीत ओर यथासम्भव अधिक से अधिक नीचे झुकें (दूसरे हाथ की हथेली उसी ओर के पैर पर बगल में घर्षण करते हुए नीचे जाएगी); फिर श्वास छोड़कर हाथों की स्थिति प्रारम्भिक अवस्था में वापिस लाकर पुन: आवृत्ति को विपरीत दिशा की ओर से दोहरायें।

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स्थिति 9: इस स्थिति में भी पंजों में यथासम्भव फासला रखकर; फिर आगे झुककर श्वास छोड़ते हुए एक हाथ की हथेली को वेगात्मक रूप से विपरीत पंजे से स्पर्श करायें, इसी प्रक्रिया के दौरान कमर बगल से मोड़ते हुए दूसरे हाथ को ऊपर की ओर सीधा ले जाकर कन्धे के ऊपर से उसी हाथ को देखें; फिर श्वास लेते हुए दोनों हाथों को मध्य में लाकर दूसरी ओर से आवृत्ति दोहरायें।

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स्थिति 10: इस स्थिति में यथासम्भव पैर के पंजों में कन्धों के समान दूरी रखते हुए श्वास भरकर दोनों हाथों को सामने से वेगात्मक रूप से ऊपर की ओर सीधा उठाकर (हाथ कानों से स्पर्श हों) गर्दन व हाथों को एक साथ यथासम्भव पीछे की ओर झुकायें; फिर श्वास छोड़ते हुए वेगात्मक रूप से दोनों हाथों को सामने से सीधा लाकर हथेलियाँ जमीन से व बिना घुटने मोड़े माथा घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करे; फिर श्वास भरकर उठते हुए आवृत्ति को पुन: दोहरायें।

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स्थिति 11: इस स्थिति में सीधे खड़े होने के बाद दोनों हाथों को उठाकर श्वास भरते हुए बगल से ऊपर लाकर हथेलियों को स्पर्श कराते हुए, ताली बजायें; फिर उछलकर श्वास छोड़ते हुए हाथों को नीचे जंघाओं के बगल तक लायें। इस आवृत्ति को यथासम्भव वेगात्मक रूप से श्वास के साथ बार-बार दोहरायें।

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स्थिति 12: इस स्थिति में सर्वप्रथम दोनों हाथों को सामने जमीन के समानान्तर फैलाकर खड़े हो जायें (पूरी क्रिया के दौरान पैरों के पंजों को यथासम्भव आपस में नजदीक रखेंगे); फिर इस प्रकार उछलें कि कमर, घुटने व पैर के पंजे एक तरफ हो जाएँ तथा दूसरी तरफ बगल में दोनों हाथ आ जायें, दायीं ओर हाथ व बायीं ओर कमर ले जाते समय श्वास अन्दर व दूसरी तरफ  से करते समय श्वास को बाहर निकाल कर क्रिया को यथासम्भव वेगात्मक रूप से दोहरायें। अभ्यासकर्ता यह भी सुनिश्चित करे कि जिस ओर हाथ जाये, गर्दन को मोड़ते हुए मुख भी उसी दिशा की ओर जायेगा।

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विशेष  
  • यह अभ्यास सुबह-शाम दोनों समय किया जा सकता है।
  • अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए।
  • श्वास-प्रश्वास के ऊपर ध्यान देते हुए उपर्युक्त क्रियाओं का अभ्यास करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
  • शरीर के समस्त अङ्ग क्रियाशील एवं स्वस्थ हो जाते हैं।
  • शरीर लचीला व सुदृढ़ हो जाता है।
  • हड्डियाँ एवं सन्धियाँ बलिष्ठ एवं स्वस्थ बनते हैं।
तो आइये इन प्रयोगोंसे शरीर को आसन के निमित्त एवं जीवन को राष्ट्र निर्माण हेतु तैयार करें। स्वयं स्वस्थ बनें, राष्ट्र को सशक्त बनायें।

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