ज्ञानपथ: ‘नोटबुक’ के साथ-साथ श्रेष्ठ संस्कार का बीजारोपण भी
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हम माता-पिता-वरिष्ठ सब यही तो चाहते हैं, हमारे प्यारे बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ ऐसे सर्वोत्तम संस्कार मिलें जो उनके हृदय पटल पर सदा अटल बने रहें, हम भी यही चाहते हैं। हमारी ज्ञानपथ नोटबुक भी इसी दिशा में कार्य करती हैं। परम पूज्य आचार्य श्री जी की पावन प्रेरणा से दिव्य प्रकाशन के अंतर्गत ऐसी ही नोटबुक एवं रजिस्टर तैयार किये गए हैं, जिनमे विद्यार्थियों के लिए जीवन में महान् उद्देश्य को प्राप्त करने से लेकर श्रेष्ठ महान् विचारों के लिए बीज मंत्र दिए गए है। जो उनके साथ निरंतर उनके विद्यार्थी काल में संग-संग रहेंगे और उन्हें जीवन को बड़े महान उद्देश्यों के लिए जीने के लिए उनके भीतर प्रतिपल एक नई उमंग भरते रहेंगे। इस नोटबुक व रजिस्टर का निर्माण बहुत ही स्नेह के साथ किया गया है। इसमें योगऋषि परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के अनमोल 20 प्रेरणादायक वाक्य दिए गए हैं, जो इस प्रकार है:-
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आप भी दुनिया की प्रथम पंक्ति के लोगों के साथ खड़े होने का गौरव प्राप्त कर सकते हो। आपके अंदर भी अपार सामर्थ्य का भण्डार है, आपको उसे जानना है।
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यह मनुष्य का जन्म हमारे लिए भगवान् का सबसे बड़ा उपहार है।
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मैं प्रतिपल प्रेम, करुणा, साहस, शौर्य, शक्ति और आत्मविश्वास से भरा हुआ जीवन जीऊँगा।
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आत्मविश्वास मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र है।
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यदि हम अपनी आंतरिक क्षमताओं का पूरा उपयोग करें तो हम पुरुष से महापुरुष, युगपुरुष एवं मानव से महामानव बन जाते हैं।
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जीवन को छोटे उद्देश्य के लिए जीना, जीवन का अपमान करना है।
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हमारे विचार ही हमारी संपूर्ण खुशियों का आधार है। हमारे विचार ही हमें बुद्धिमान, बलवान, दयावान, महान बनाते हैं।
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भगवान् महान कार्य करने के लिए तुम्हारा चयन करना चाहते हैं, तुम उस विराट् को अपने भीतर समग्रता से उतरने दो।
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बड़ी सोच, कड़ी मेहनत और पक्का इरादा ये तीनों ही सफलता के सूत्र हैं।
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बाधाओं से रूके नहीं, संकटों व प्रलोभनों में झुके नहीं। जीवन में विचलित हुए बिना तब तक आगे बढ़ते रहें जब तक ध्येय न मिल जाए।
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माता-पिता इस धरती के भगवान् हैं।
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नशीले पदार्थों के सेवन से तन, मन, धन, धर्म व आत्मा की हानि होती है और अपनी व परिवार की बदनामी होती है। अत: इनका एक बार भी सेवन नहीं करना चाहिए।
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सदैव अपनी छोटी-छोटी गलती से बचने की कोशिश करें, क्योंकि मनुष्य पहाड़ों से नहीं अपितु छोटे-छोटे पत्थरों से ठोकर खाता है। अत: प्रतिपल अशुभ से सजग रहें।
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कोई भी कार्य जिसे आप आज और अभी कर सकते हैं, उसे कल पर न टालें।
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तीन वस्तुएं जाने के बाद कभी वापस नहीं आती है- समय, शब्द और अवसर।
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क्रोध अकेला आता है, परंतु हमारी सारी अच्छाई साथ लेकर चला जाता है। अत: हमें हमेशा अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए।
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गुण और दोष प्रत्येक व्यक्ति में होते हैं, योग से जुडऩे के बाद दोषों का शमन हो जाता है और गुणों में बढ़ोतरी होने लगती है।
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मनुष्य की सबसे बड़ी विजय, अपनी दुर्बलताओं पर विजय पाना है।
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योगी बनना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धता है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि यह अष्टांग योग है, बिना अष्टांग योग की साधना के कोई योगी नहीं बन सकता।
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ज्ञान का अर्थ मात्र जानना नहीं, वैसा हो जाना होता है।
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इतना ही नहीं, इस नोटबुक के अंतिम दो पृष्ठों में बच्चों के तेज दिमाग, मजबूत आत्मविश्वास, एकाग्रता, उनकी मांसपेशियों व हड्डियों की मजबूती, अच्छी Personality के लिए एवं स्ट्रेस, माइग्रेन, अनिद्रा से मुक्ति के लिए योगासन व प्राणायाम बताए गए हैं।
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इतना ही नहीं, इस नोटबुक के कवर पेज के अंदर के पृष्ठ पर दिए हैं हमारे भारत के महान् क्रांतिकारियों देशभक्तों एवं आध्यात्मिक महापुरुषों के सुन्दर चित्र जिनके महान् जीवन को जानकर वह भी उनका अनुसरण करेंगे व उनकी ही तरह हमारे भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन करेंगे।
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सबसे महत्वपूर्ण इस नोटबुक के कवर पेज के अंत में हैं योगऋषि परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज एवं आयुर्वेद गौरव परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का विद्यार्थियों के लिए पावन संदेश जिसे आप अपने स्मार्टफोन से Barcode स्कैन करके सुन सकते हैं। बच्चे परम पूज्य स्वामी जी व परम श्रद्धेय आचार्य जी से निरंतर जुड़े रहें, उनसे निरंतर पावन प्रेरणा पाते रहें इसके लिए सभी बच्चे हमारे YouTube चैनल 'Divine Transformation' से भी जुड़ें।
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हमारा उद्देश्य है, इन नोटबुक के माध्यम से देश के प्यारे बच्चों के भीतर देशभक्ति की अलख जगाई जाए। योगशक्ति के माध्यम से उनके अंदर छिपे अपार सामर्थ को जागृत किया जाए। उनके जीवन में जाति-धर्म की दुर्भावना के स्थान पर राष्ट्रहित सर्वोपरि है, यही भावना उनमें दृढ़ हो। शक्तिशाली आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वह अपना अभिन्न योगदान समर्पित कर हमारे महान् ऋषियों, योगी-योद्धाओं का गौरव बढ़ाएं।
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यह नोटबुक व रजिस्टर प्राप्त करने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.divyaprakashan.com पर जाकर ऑनलाइन आर्डर कर सकते हैं। अपने स्कूल व स्टेशनरी की दुकान पर आकर्षक छूट व स्कीम के साथ नोटबुक मंगवाने व वितरक बनने के लिए आप हमसे मेल व फोन के माध्यम से संपर्क भी कर सकते हैं (ईमेल: divyaprakashan@divyayoga.com, मोबाइल नंबर: 7302732334)
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