विचार मंथन के लिए आमंत्रण
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आचार्य बालकृष्ण
ब्रह्म मुहूर्त अमृत बेला है, भगवान् के विधान के तहत जीवन का श्रेष्ठतम समय होता है। ब्रह्म मुहूर्त में योग का सर्वाधिक लाभ होता है। सुबह-सुबह योग तथा दिनभर कर्मयोग मात्र ये दो काम देश व दुनियां के लोग करना शुरू कर दें, तो दुनियां में कोई दु:ख, दारिद्रय, रोग, नशा, हिंसा, झूठ, बेईमानी, अशुचिता, असंतोष, अन्याय, शोषण, भेदभाव, क्रूरता या युद्ध आदि होगा ही नहीं। |
1. क्या हमने ईश्वर प्रदत्त ज्ञान, संवेदना एवं सामर्थ्य को ठीक-ठीक जाना, जगाया तथा सही दिशा में लगाया है? 90 से 99% लोग अपनी अनन्त प्रतिभा को न तो ठीक-ठीक जानते हैं न ही उसे जगाने के प्रचंड पुरुषार्थ करते हैं और भगवान् की अहेतुकी कृपा का पूरा-परा आदर नहीं कर पाते। मुझे तो संसार के समस्त दु:खों का यह मूलभूत कारण विदित होता है।
2. क्या हमें अपने जीवन, समय, शक्ति एवं प्रतिभा का आदर्श रूप में प्रबंध कर पा रहे हैं? यदि हाँ, तो इसे दीर्घकाल तक करते रहिए और यदि ना तो तुरन्त सुधार कीजिए।
3. वैयक्तिक, पारिवारिक, व्यवहारिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक संदर्भ में हमारी समझ अत्यन्त विवेकपूर्ण एवं व्यवहारिक एवं तार्कित होनी चाहिए अन्यथा हम भ्रम व अशान्ति में रहेंगे। किसी भी सन्दर्भ में संशय हमारे विनाश का कारण होता है।
संशयात्मा विनस्यति।।
4. निवृत्ति मूलक प्रवृत्ति में जीने वाले व्यक्ति का ही जीवन पूर्ण सुखी होता है। जीवन की पूरी अभिव्यक्ति प्रवृत्ति में तथा जीवन की पूर्ण शान्ति निवृत्ति में है। बिना निवृत्ति के कामनाओं, वासनाओं एवं शारीरिक वैषयिक आकर्षणों, प्रलोभनों, कुसंस्कारों, दुर्विचारों, दुर्भावनाओं, दोषों, प्रमादों से मुक्त रहना संभव नहीं है।
5. आहार, विचार, वाणी, व्यवहार, स्वभाव, सम्बंध, व्यापार, उपकार से लेकर आत्म साक्षात्कार तक जीवन के प्रत्येक संदर्भ में मर्यादा बनी रहे। मर्यादा का अतिक्रमण किसी भी कीमत पर न हो, यह हमारी सर्वोपरि प्राथमिकता होनी चाहिए ।
6. हमारे किसी भी निर्णय, आचरण, व्यवहार, रीति व नीति से व्यक्ति, समाज या पूरी मानवता का ध्यान किसी भी गलत बात की ओर नहीं जाना चाहिए। यह बहुत बड़ा सामाजिक अपराध है।
7. हमें समाज, भगवान् या हमारा पुरुषार्थ व प्रारब्ध जितना बड़ा बनाता है, उतना ही हमारा उत्तरदायित्व और अधिक बढ़ जाता है।
8. ब्रह्म मुहूर्त अमृत बेला है, भगवान् के विधान के तहत जीवन का श्रेष्ठतम समय होता है। ब्रह्म मुहूर्त में योग का सर्वाधिक लाभ होता है। सुबह-सुबह योग तथा दिनभर कर्मयोग मात्र ये दो काम देश व दुनियां के लोग करना शुरू कर दें, तो दुनियां में कोई दु:ख, दारिद्रय, रोग, नशा, हिंसा, झूठ, बेईमानी, अशुचिता, असंतोष, अन्याय, शोषण, भेदभाव, क्रूरता या युद्ध आदि होगा ही नहीं।
9. मुझे तो ऐसा लगता है दुनियां के कुछ शक्तिशाली लोगों ने यह भ्रम बनाया हुआ है कि सब लोग धनवान्, महान्, पराक्रमी व विजेता नहीं हो सकते, जिससे कि इन तथाकथित साम्राज्यवादी ताकतों की निरंकुश सत्ता, सम्पत्ति व साम्राज्य निर्बाध फलते-फूलते रहें और लोग इसे अपना प्रारब्ध या संसार का सच मानकर विविध प्रकार की रोगों व भोगों की गुलामियों व पराधीनताओं में जीते रहें व किसी भी प्रकार का विद्रोह व विजेता बनने का साहस न जुटा पायें।
10. भोर में उठते ही ये सोचें कि मैं ईश्वर की संतान, ऋषि-ऋषिकाओं का वंशज, दैवी सम्पद सम्पन्न एक महान आत्मा हूँ। यह विचार ही संसार में आपको श्रेष्ठतम मनुष्य बनायेगा।
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