परम पूज्य योग-ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से निःसृत शाश्वत सत्य...

पतंजलि की प्रेरणा

परम पूज्य योग-ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से निःसृत शाश्वत सत्य...

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  1.   पूरा विश्व विचारधाराओं की दृष्टि से मुख्य रूप से दो धाराओं में विभाजित है- एक भौतिकवादी सिद्धान्त नीतियां, विकास, समृद्धि एवं मानवीय विकास या खुशहाली के मापदण्ड, दूसरी दृष्टि अध्यात्मवादी सिद्धान्त, रीति-नीति, विकास संस्कृति मूलक समृद्धि एवं मानवीय चेतना के विकास या आरोहण या पूर्ण सुखी सम्पन्न, प्रसन्न जीवन के          मापदण्ड क्या होने चाहिए? भौतिकवादी अपने आपको नास्तिक कहने में गौरव अनुभव करते हैं एवं भौतिक समृद्धि के आधार मनुष्य के जीवन की उपादेयता, प्रयोजन अन्तिम लक्ष्य को निर्धारित करते हैं। अध्यात्मवादी भौतिक समृद्धि के साथ-साथ पारमार्थिक सत्यों को भी स्वीकारते हैं एवं केवल भौतिक समृद्धि, ऐश्वर्य या विकास को अधूरा मानते हैं।
 दुर्भाग्य से भौतिकवादी दृष्टिकोण तो आधा-अधूरा है ही लेकिन स्वयं को आस्तिक या आध्यात्मिक कहने वाले लोगों के पास पूरे संसार में कोई बड़ा आदर्श, उदाहरण या प्रेरणा नहीं है, जिसने भौतिकता के साथ आध्यात्मिकता का पूर्ण संतुलन रखते हुए कोई ऐतिहासिक कीर्तिमान गढ़ा हो। 
 पूरे संसार में पतंजलि ही एकमात्र ऐसी संस्था या संगठन है जो व्यवहारिक जीवन पारमार्थिक जीवन के तथ्यों सत्य सिद्धान्तों को एक साथ लेकर अभ्युद्य एवं नि:श्रेयस की सिद्धि के लिए अखंड-प्रचंड पुरुषार्थ कर रहा है। आज भारत ही नहीं पूरा विश्व पतंजलि के मॉडल की ओर आशा विश्वासभरी नजऱ से देख रहा है। देश में यदि 100 व्यक्ति या 100 संस्थाएं भी पतंजलि की तरह पुरुषार्थ या परमार्थ में लग जायें तो यह भारत आर्थिक आध्यात्मिक दृष्टि से विश्व का नेतृत्व मार्गदर्शन करने में समर्थ हो जायेगा।
2.     योग, आयुर्वेद, स्वदेशी के आंदोलन के बाद अब पूरे विश्व को आर्थिक पारमार्थिक दिशा देते हुए पतंजलि पूरे विश्व को शिक्षा चिकित्सा व्यवस्था को आदर्श रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है तथा भविष्य में विश्व का इन दोनों क्षेत्रों में मार्गदर्शन करने या दिशा देने में बड़ी भूमिका निभायेगा।
भारतीय शिक्षा बोर्ड पतंजलि ग्लोबल गुरुकुल एवं पतंजलि ग्लोबल यूनिवर्सिटी इस दिशा में पूरे विश्व की बड़ी प्रेरणाएं होंगी। 
3.  एक तरफ पूरे संसार का मेडिकल माफिया ड्रग माफिया एक तरफ एक संन्यासी आचार्य या पतंजलि योगपीठ की सात्विक शक्ति इन सब पर भारी पड़ रही है। दो बड़ी बातें तो समाज में बहुत बड़े रूप में स्थापित हो गई हैं एक स्वास्थ्य के बारे में कुछ भी बड़ा निर्णय लेने से पहले लोग एक ओपियन पतंजलि का भी जानना चाहते हैं तथा पूरी मेडिकल इंडस्ट्री यदि एक संन्यासी से इतना खौफ खाती है तो साफ दिखता है कि पतंजलि का योगदान इस देश दुनियां के लिए क्या है?

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